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CSE Current Affairs 15 Nov, 03:48
Next Dose #613 | 15 November 2019 Current Affairs | Daily Current Affairs | Current Affairs In Hindi

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CSE Current Affairs 14 Nov, 14:57
जाने क्या है सबरीमाला केस, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को सौंपा
सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर 2019 को केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के फ़ैसले के विरुद्ध दाख़िल की गई पुनर्विचार याचिका को पांच जजों की बेंच ने सात जजों की बड़ी बेंच के पास भेज दी है. यह फैसला बेंच ने 3:2 से सुनाया है.

पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच में दायर की गई थीं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने केस बड़ी बेंच को भेजने का फैसला दिया. जस्टिस फली नरीमन तथा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसके खिलाफ फैसला दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने फ़रवरी 2019 में मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटा दी थी.

पुनर्विचार याचिका का विरोध करते हुए केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि महिलाओं को रोकना हिन्दू धर्म में अनिवार्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में केवल दो महिलाएं किसी तरह पहुंच पाई थीं. हालांकि इन दो महिलाओं के प्रवेश से केरल में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी थी. सबरीमाला फैसले पर 56 पुनर्विचार समेत 65 याचिकाएं दायर की गई थीं. कोर्ट ने इन पर 06 फरवरी 2019 को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दिया था. कोर्ट ने कहा था की दशकों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा गैरकानूनी और असंवैधानिक थी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा था की धर्मनिरपेक्षता का माहौल कायम रखने हेतु कोर्ट को धार्मिक अर्थों से जुड़े मुद्दों को नहीं छेड़ना चाहिए. जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था की शारीरिक वजहों से मंदिर आने से रोकना रिवाज का जरूरी हिस्सा नहीं है. ये सोच पुरूष प्रधान दर्शाता है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था की महिला को पीरियड्स के आधार पर प्रतिबंधित करना असंवैधानिक है. यह मानवता के खिलाफ है.

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं पर प्रतिबन्ध क्यों?

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान हिंदू मान्यता में अपवित्र माना जाता है. जिसके अक्रन मंदिर में उनके प्रवेश पर रोक थी. कई महिला वकीलों ने साल 2006 में लैंगिक समानता को आधार बनाकर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका डाली थी. इस संबंध में उसके बाद कई और याचिकाएं डाली गईं. केरल हिंदू प्लेसेस ऑफ पब्लिक वर्शिप रूल्स, 1965 के नियम 3(बी) को पांच महिला वकीलों के समूह ने चुनौती दी थी. इस नियम में महिलाओं को पीरियड्स वाले आयुवर्ग के दौरान मंदिर में प्रवेश से रोके जाने का प्रावधान है. ऐसे में महिला वकीलों ने केरल हाईकोर्ट के बाद न्याय हेतु सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

यह भी पढ़ें:अयोध्या विवाद: अयोध्या का विवादित जमीन राम लला को, मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में दूसरी जगह जमीन: सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला कार्यसमिति का आरोप

सबरीमाला कार्यसमिति ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देकर उनके रीति-रिवाज तथा परंपराओं को नष्ट किया है. लोगों की मान्यता है कि 12वीं सदी के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं. जिस कारण से मंदिर में 10 साल से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित किया गया था.

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CSE Current Affairs 14 Nov, 14:57
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राफेल पर पुनर्विचार याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही राफेल सौदे पर अपने पिछले फैसले के खिलाफ दायर सभी समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने 14 दिसंबर 2018 के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग वाली याचिकाओं केा खारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने राफेल मामले में दायर की गईं सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ भी शामिल थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा की हमने पाया कि पुनर्विचार याचिकाएं सुनवायी योग्य नहीं हैं.

राफेल मामले में समीक्षा याचिकाएं प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दायर की थीं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने फैसला सुनाया है. हालांकि इस फैसले की समीक्षा के लिए कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं. सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई 2019 को इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 10 अप्रैल को दस्तावेजों की जांच के खिलाफ केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया था. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि दस्तावेज प्राधिकरण के बिना प्राप्त किये गये थे तथा इसलिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन किया गया.

सुप्रीम कोर्ट का 14 दिसंबर का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 14 दिसंबर 2018 के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग वाली याचिकाओं केा खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर के फैसले में कहा था कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने में निर्णय निर्धारण की प्रक्रिया पर संदेह करने की कोई बात नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले में 14 दिसंबर 2018 को दिए अपने फैसले में केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी थी.

यह भी पढ़ें:अब RTI के दायरे में आएगा भारत के चीफ जस्टिस का ऑफिस: सुप्रीम कोर्ट

क्या था पुनर्विचार याचिका में?

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाए गये थे. सुप्रीम कोर्ट में विमानों की कीमत को लेकर भी याचिका डाली गई थी. याचिकाओं  ने ‘लीक’ दस्तावेज का हवाला देते हुए आरोप लगाए गये कि इस समझौता में पीएमओ ने रक्षा मंत्रालय को भी भरोसे में नहीं लिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वे ठोस सबूतों के बगैर इस मामले में कोई दखल नहीं देगी.

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CSE Current Affairs 14 Nov, 14:57
प्रसिद्ध गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन
बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 14 नवंबर 2019 को निधन हो गया है. वे 74 वर्ष के थे. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई है. पिछले कई सालों से वशिष्ठ नारायण सिंह बीमार चल रहे थे. उनका इलाज पटना के पीएमसीएच अस्पताल में चल रहा था.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई नेताओं ने वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वशिष्ठ बाबू के निधन से बहुत दुख हुआ है. उन्होंने अपने ज्ञान से पूरे बिहार का नाम रोशन किया है.

आंइस्टीन को दी थी चुनौती

वशिष्ठ नारायण सिंह ने आंइस्टीन के सापेक्ष सिद्धांत को चुनौती दी थी. उनके बारे में मशहूर है कि नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय हेतु बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका तथा कंप्यूटर्स का गणना (कैलकुलेशन) एक था.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से पीएचडी

वशिष्ठ नारायण सिंह जब पटना साइंस कॉलेज में पढ़ रहे थे तभी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी. प्रोफेसर कैली ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण दिया.

वशिष्ठ नारायण साल 1965 में अमेरिका चले गए. उन्होंने साल 1969 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की. वे वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. उहोने नासा में भी काम किया लेकिन मन नहीं लगा और साल 1971 में भारत लौट आए.

उन्होंने भारत में पहले आईआईटी कानपुर, फिर आईआईटी बंबई, और फिर आईएसआई कोलकाता में भी नौकरी की.

यह भी पढ़ें:शोले में 'कालिया' का किरदार निभाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता विजू खोटे का निधन

वशिष्ठ नारायण सिंह के बारे में

• वशिष्ठ नारायण सिंह एक भारतीय गणितज्ञ थे.

• उनका जन्म बिहार के भोजपुर जिला में बसंतपुर नाम के गाँव में हुआ था.

• उन्होंने बर्कली के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से साल 1969 में गणित में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी.

• वर्ष 1973 में वंदना रानी सिंह से उनकी शादी हुई.

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CSE Current Affairs 14 Nov, 14:56
Children's Day 2019: जानें बाल दिवस की शुरुआत कब हुई?
भारत में प्रतिवर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस के रुप में मनाय़ा जाता है. बाल दिवस बच्चों के अधिकार, देखभाल तथा शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने हेतु मनाया जाता है. भारत में बाल दिवस भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन पर प्रत्येक साल मनाया जाता है. बाल दिवस जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन पर बच्चों के प्रति उनके स्नेह के रुप में मनाया जाता है.

बाल दिवस बच्चों को समर्पित भारत का एक मुख्य राष्ट्रीय त्योहार है. भारत के अतिरिक्त बाल दिवस विश्व भर में अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है. पंडित जवाहर लाल नेहरु अपना अधिकतर समय बच्चों के साथ बिताना पसंद करते थे, वो हमेशा बच्चों के प्रति अपना स्नेह जाहिर करते थे.

बाल दिवस का इतिहास: 

बाल दिवस की नींव साल 1925 में रखी गई थी. इसके बाद विश्व भर में साल 1953 में इसे मान्यता मिली. संयुक्त राष्ट्र ने 20 नवंबर 1958 को बाल अधिकारों की घोषणा की लेकिन यह भिन्न-भिन्न देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है. बाल दिवस आज भी कुछ देशों में 20 नवंबर को मनाया जाता है. कई देशों में साल 1950 से बाल संरक्षण दिवस (01 जून) पर ही बाल दिवस मनाया जाता है. इसे ‘विश्व बाल दिवस’ के नाम से जाना जाता है. यह दिवस बच्चों के बेहतर भविष्य तथा उनकी मूल आवश्यकताओं को पूरा करने की याद दिलाता है.

भारत में 'बाल दिवस' मनाने की शुरुआत कब हुई?

प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन 27 मई 1964 को हो गया था. उनके निधन के बाद बच्चों के प्रति उनके प्यार को देखते हुए सभी के सहमति से यह निर्णय लिया गया कि अब से प्रत्येक साल 14 नवंबर को चाचा नेहरू के जन्मदिवस पर बाल दिवस मनाया जाएगा. इसलिए प्रत्येक साल 14 नवंबर को पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के दिन पूरे भारत में ‘बाल दिवस’ मनाया जाता है.

यह भी पढ़ें:अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?

पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में

• पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था.

• पंडित जवाहर लाल नेहरू की शादी साल 1916 में कमला नेहरू से हुई.

• वे स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे.

• उन्होंने इंग्लैंड कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से एमए किया.

• पंडित नेहरू को आजादी के आंदोलन में साल 1929 में पहली बार जेल हुई.

• उन्होंने ग्लिंप्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री, डिस्कवरी ऑफ इंडिया जैसी कुछ पुस्तकें भी लिखी हैं.

• उन्हें साल 1955 में ‘भारत रत्न’ से सम्मनित किया गया था.

• जवाहर लाल नेहरू की 16 साल की उम्र तक अधिकांश शिक्षा उनके घर पर ही हुई.

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CSE Current Affairs 14 Nov, 03:42
Next Dose #612 | 14 November 2019 Current Affairs | Daily Current Affairs | Current Affairs In Himdi

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CSE Current Affairs 13 Nov, 17:00
ICC Player Rankings 2019: भारत के विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह शीर्ष स्थान पर बरकरार
सरकारी नौकरी प्राप्त करने हेतु युवाओं के लिए आज है ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (TRIFED), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), MSME टेक्नोलॉजी सेंटर, ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL), शिपिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (SCI) एवं अन्य में निकाली गई 4200+ नौकरियों के लिए युवा आज ही आवेदन करके अपने सपनों को साकार कर सकते हैं. विभिन्न ग्रुप ए, बी, सी, GD हेड कांस्टेबल, इंजीनियर, मैनेजर, मैन पॉवर, सेक्रेटेरियल ऑफिसर एवं अन्य पदों की भर्ती के लिए 4200+ बम्पर वेकेंसियों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं. युवाओं को इन पदों के लिए आवेदन करने का अति उत्तम अवसर.

ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (TRIFED) ने ग्रुप ए, बी और सी पोस्टों पर भर्ती लिए आवेदन आमंत्रित किये. Eligible Candidates 30 नवंबर 2019 तक या उससे पहले Online Mode से इन पोस्टों के लिए Apply कर सकते हैं.

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने स्पोर्ट्स पर्सन से कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) पोस्टों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किये. सभी Eligible पुरुष और महिला उम्मीदवार 17 दिसंबर 2019 तक या उससे पहले CISF GD कांस्टेबल भर्ती के लिए Apply कर सकते हैं. हालांकि, उत्तर पूर्व क्षेत्र के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर 2019 है. सबसे पहले आवेदन करने वाले Candidates को ट्रायल टेस्ट के लिए बुलाया जायेगा. ट्रायल टेस्ट में शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को 40 अंकों की प्रवीणता परीक्षा में भाग लेना होगा. बाद में, प्रवीणता परीक्षा और किसी भी टूर्नामेंट / प्रतियोगिता के दौरान उम्मीदवारों की उपलब्धि / प्रदर्शन के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार कर Candidates का सेलेक्शन किया जायेगा. अंत में चयनित उम्मीदवार Medical Test से गुजरना पड़ेगा.

MSME टेक्नोलॉजी सेंटर, कानपुर ने इंजीनियर, मैनेजर और अन्य पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किये. Eligible Candidates रोजगार समाचार पत्र में इस विज्ञापन के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों (9 दिसंबर 2019) के भीतर इन पोस्टों के लिए Apply कर सकते हैं.

ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) ने मध्यांचल विद्युत निगम लिमिटेड (MVVNL) में 3895 रिक्त पोस्टों पर भर्ती के लिए Notification जारी किया है. उम्मीदवार BECIL MVVNL भर्ती 2019 के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. BECIL ऑनलाइन Application 08 नवंबर 2019 से शुरू होगा. Candidates MVVNL के लिए 18 नवंबर 2019 तक ऑनलाइन Apply कर सकते हैं.

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने सेक्रेटेरियल ऑफिसर पोस्ट पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. Eligible Candidates 21 नवंबर 2019 को आयोजित किए जाने वाले वॉक-इन-इंटरव्यू में शामिल हो सकते हैं.

ट्राइफेड (TRIFED) भर्ती 2019: 86 ग्रुप ए, बी एवं सी पोस्टों के लिए करें अप्लाई

CISF भर्ती 2019, 300 GD हेड कांस्टेबल पोस्टों के लिए करें अप्लाई

MSME टेक्नोलॉजी सेंटर, कानपुर भर्ती 2019: इंजीनियर, मैनेजर एवं अन्य पोस्टों के लिए करें अप्लाई

BECIL नोएडा भर्ती 2019: MVVNL UP के लिए निकली 3895 वेकेंसी के लिए करें अप्लाई

शिपिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (SCI) भर्ती 2019: सेक्रेटेरियल ऑफिसर पोस्ट के लिए करें अप्लाई



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CSE Current Affairs 13 Nov, 16:59
अब RTI के दायरे में आएगा भारत के चीफ जस्टिस का ऑफिस: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने 13 नवंबर 2019 को बड़ा फैसला सुनाया. अब भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) का ऑफिस भी सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आयेगा. हालांकि, कोर्ट ने इसमें कुछ नियम भी जारी किए हैं.

इसपर फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने सुनाया है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के साथ, जस्टिस डिवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एनवी रामना, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपक गुप्ता शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के सवाल पर दिया. हालांकि इसमें निजता और गोपनीयता का हवाला देकर कुछ शर्तें जोड़ी गई हैं. फैसले में कहा गया है कि सीजेआई ऑफिस एक पब्लिक अथॉरिटी है, इसके तहत ये आरटीआई के तहत आएगा. हालांकि, इस दौरान कार्यालय की गोपनीयता बरकरार रहेगी.

इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 124 के अंतर्गत लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कोलेजियम के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाला जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरटीआई के तहत जवाबदारी से पारदर्शिता और बढ़ेगी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना के द्वारा लिखे फैसले पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता ने सहमति जताई. हालांकि, जस्टिस रमन्ना तथा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कुछ विषयों पर अपनी अलग राय व्यक्त की.

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिया गया फैसला

अपने एक फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट और उसके मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर आरटीआई एक्ट के दायरे में आते हैं. इसलिए उन्हें अपनी संपत्ति आदि का ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए. दिल्ली हाईकोर्ट के इसी फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी.

यह भी पढ़ें:सात उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीश नियुक्त, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

पृष्ठभूमि

आरटीआई के कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने साल 2007 में आरटीआई डालकर जजों की संपत्ति का ब्यौरा मांगा था. जब इस मामले पर सूचना देने से मना कर दिया गया तो ये मामला केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) के पास पहुंचा. सीआईसी ने सूचना देने के लिए कहा.

इसके बाद इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जनवरी 2010 को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई कानून के दायरे में आता है. सुप्रीम कोर्ट के जनरल सेक्रेटरी और सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट चले गये. अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट में इसपर सुनवाई हुई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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CSE Current Affairs 13 Nov, 16:59
बोलिविया में राजनीतिक संकट: मेक्सिको ने बोलीविया के पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस को शरण दी
मेक्सिको ने बोलीविया के पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस को देश में शरण दी है. उन्होंने चुनाव नतीजों में गड़बड़ी के आरोपों के बाद सेना और जनता के बढ़ते दबाव के बीच 10 नवंबर 2019 को इस्तीफा दे दिया था. मेक्सिको सरकार ने कहा कि शरण मानवीय आधार पर दिया गया है, क्योंकि बोलीविया में इवो मोरालेस की जान को खतरा था.

विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव के बाद अपने विरुद्ध जबरदस्त विरोध के कारण इवो मोरालेस को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था. उन्होंने मेक्सिको की वायुसेना के विमान से बोलीविया छोड़ दिया. मेक्सिको के राष्ट्रपति आंद्रे मैनुएल लोपेज ओबराडोर ने भी इस्तीफा देने का निर्णय के लिए उनका समर्थन किया. उन्होंने कहा की मोरालेस के इस साहसिक कदम से बोलीविया की जनता पर से संकट टल गया.

बोलिविया में राजनीतिक संकट क्या है?

• ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स (ओएएस) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि 20 अक्टूबर को हुए चुनाव में भारी गड़बडि़यां मिली हैं. इसलिए देश में एक नया चुनाव होना चाहिए.

• मोरालेस इसके लिए सहमति व्यक्त की, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर सेना प्रमुख जनरल विलियम्स कलीमन ने स्पष्ट कर दिया कि यह पर्याप्त नहीं होगा. उनकी घोषणा के बाद, देश में भारी बवाल शुरू हो गया था.

• इस घोषणा के बाद, मोरालेस के समर्थकों और उनके प्रतिद्वंद्वियों के बीच झड़पें हुई थीं जिनमें कई लोग मारे गये और 100 से अधिक घायल हो गये. इवो मोरालेस सबसे पहले साल 2006 में चुने गए थे.

• इसके तुरंत बाद, इवो मोरालेस ने टेलीविजन प्रसारण के माध्यम से अपने इस्तीफे की घोषणा की.

यह भी पढ़ें:ईरान ने 53 अरब बैरल के नये तेल भंडार की खोज की

इवो मोरालेस के बारे में

• मोरालेस बोलीविया की मूल निवासी आबादी के राष्ट्रपति बनने वाले पहले सदस्य थे. वे 13 साल 09 महीने तक सत्ता में रहे जो देश के इतिहास में सबसे बड़ा कार्यकाल है.

• उन्‍होंने पिछले महीने बोलीविया में जो चुनाव हुए थे उनमें चौथी बार जीतने का दावा किया था.

• वे पहली बार साल 2006 में चुने गए थे. वे दक्षिण अमेरिका के गरीब देश को आर्थिक विकास के रास्ते पर ले गए थे.

• उन्होंने सड़कों को पक्का करने, बोलीविया के पहले उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजने तथा महंगाई पर लगाम लगाने जैसे महत्वपूर्ण काम किये.

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CSE Current Affairs 13 Nov, 16:18
महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन, जाने महाराष्ट्र में कब-कब लगा राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र में 12 नवंबर 2019 को राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया है.

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन 6 महीने के लिए लगाया गया है, हालांकि, अगर इस अवधि के दौरान कोई भी पार्टी बहुमत साबित करती है, तो सरकार बनाई जा सकती है.

राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्य की वर्तमान स्थिति के अनुसार चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिन बीत गए है और सरकार बनने कि कोई संभावना भी नहीं दिख रही है. राज्यपाल ने कहा कि सरकार बनाने हेतु सभी प्रयास किए गए हैं, लेकिन उन्हें महाराष्ट्र में स्थायी सरकार की कोई संभावना नहीं दिखती है.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 105 सीटें जीती हैं. वहीं, शिवसेना को 56 और एनसीपी को 54 सीटें मिली हैं. कांग्रेस राज्य में चौथे नंबर पर है और उसे 44 सीटें मिली हैं. अगर हम सीटों की संख्या को देखें तो एनसीपी और शिवसेना कांग्रेस की मदद के बिना सरकार नहीं बना पाएंगे. शिवसेना की 56 सीटों और एनसीपी की 54 सीटों सहित 110 सीटें हैं. अगर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के साथ जुड़ती है, तो आंकड़ा (56 + 54 + 44) 154 तक पहुंच जाएगा. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कुल 145 सीटों की आवश्यकता है.

राष्ट्रपति शासन क्या है?

राष्ट्रपति शासन में किसी राज्य का नियंत्रण भारत के राष्ट्रपति के पास चला जाता है. अनुच्छेद 356 के मुताबिक राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं अगर वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर रही है. अनुच्छेद 352 के अंतर्गत आर्थिक आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

इसे राष्ट्रपति शासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि, इसके द्वारा राज्य का पूरा नियंत्रण एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की जगह सीधे राष्ट्रपति के अधीन आ जाता है. लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से राज्य के राज्यपाल को केंद्रीय सरकार द्वारा कार्यकारी अधिकार प्रदान किये जाते हैं.

कोई भी पार्टी दावा नहीं कर सकी

राजभवन के बयान के अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को हुए थे और परिणाम भी 24 नवंबर को घोषित किए गए थे. इसके बावजूद, अभी तक कोई भी पार्टी या गठबंधन पार्टी सरकार बनाने के लिए आगे नहीं आई है. इसलिए, राज्यपाल ने सरकार बनाने की संभावना तलाशने का फैसला किया. इसे देखते हुए, सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने के रुख को स्पष्ट करने हेतु कहा गया था. उसके बाद, देवेंद्र फड़नवीस राजभवन पहुंचे और राज्यपाल को भाजपा की सरकार बनाने में असमर्थता की जानकारी दी.

यह भी पढ़ें:बिहार सरकार का बड़ा फैसला, 15 साल से अधिक पुराने वाहनों पर लगा प्रतिबंध

महाराष्ट्र में कब-कब लगा राष्ट्रपति शासन

भारत के अलग-अलग राज्यों में अब तक करीब 125 बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है. महाराष्ट्र में 12 नवंबर 2019 से पहले तक दो बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है. अब यह तीसरी बार लागू किया गया है. महाराष्ट्र में पहली बार 17 फरवरी 1980 को लागू हुआ था. उस समय शरद पवार मुख्यमंत्री थे. राज्य में 17 फरवरी 1980 से 08 जून 1980 तक लगभग 112 दिन तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहा था.

महाराष्ट्र में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन 28 सितंबर 2014 को लगाया गया था. उस समय राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस थी. राज्य में 28 सितंबर 2014 से लेकर 30 अक्टूबर 2014 तक लगभग 32 दिनों तक राज्य में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू रहा था.

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CSE Current Affairs 13 Nov, 06:46
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CSE Current Affairs 13 Nov, 06:40
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CSE Current Affairs 13 Nov, 03:14
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CSE Current Affairs 12 Nov, 15:29
Backward and Forward Linkages mentioned in the video - (The Hindu Editorial Analysis on Youth IAS's YouTube Channel by Aayush Methi)

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Internet as a Basic Right and Digital Inequality:

💠 Article 19(1)(a): Freedom of speech and expression,provides every citizen with the right to express one’s views, opinions, beliefs, and convictions freely by word of mouth, writing, printing, picturing or in any other manner.

💠 Article 19(2) confers the right on the State to impose reasonable restrictions o it the exercise of the freedom of speech and expression on the grounds of,

🔰 Sovereignty and integrity of India,

🔰 Security of the state,

🔰 Friendly relations with foreign states,

🔰 Public order, decency or morality,

🔰 Contempt of court, defamation, and incitement to an offence.

💠 Article 21 declares that no person shall be deprived of his life or personal liberty except according to procedure established by law. This right is available to both citizens and non-citizens.

💠 Article 38 and 39 of the Constitution



💠 Explain Digital Inequality (Mention all the data of today's The Hindu editorial)



💠 Government’s effort

~ The Bharat Net programme, aiming to have an optical fibre network in all gram panchayats, was envisaged as the infrastructural backbone for having Internet access across India. However, the project has consistently missed all its deadlines while the costs involved have doubled.

~ Similarly, the National Digital Literacy Mission has impacted only 1.7% of the population and has been struggling for funds.



💠 Suggestions:


✅ A consistent definition of ‘digital literacy’should be defined for data collection and analyses by government.

✅ There is need for a national digital literacy policy to monitor the digital divide across India.

✅ There is need for a framework to establish the categorisation of creation and consumption of content. From an architect to a blogger, there is a tremendous volume of work happening in India that contributes to the digital output of the country.

✅ The potential impact of all the digital creation in India is underestimated. While consumption of digital content is huge in India, the need for increased digital creation is also of significant importance to an emerging digital economy.


✅ There is need to understand digital literacy rates of the government, the public and private sector, and the education sector.

✅ There is also need for stronger studies to identify the opportunity for every citizen to experience the value of technology.


✅ There is need to provide technological interactions with children. This will automatically force the parents, teachers and educational institutions to adopt methodologies to achieve an appropriate balance of creation and consumption of technology in the formative years of children.

💠 Other Suggestions:

✅ All states should create infrastructure for a minimum standard and quality of Internet access as well as capacity-building measures which would allow all citizens to be digitally literate

✅ States should also prohibit the activitiesthat impedes, obstructs or violates such a right.

✅ There should be recognition given to the digital literacy, which will make it easier to demand accountability from the state as well as encourage the legislature and the executive to take a more proactive role in furthering right to internet access.
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CSE Current Affairs 12 Nov, 11:03
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✅Yojana | November-2019 | Hindi | 22.2 MB

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CSE Current Affairs 12 Nov, 11:03
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CSE Current Affairs 12 Nov, 06:45
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CSE Current Affairs 11 Nov, 16:16
टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स: 11 नवंबर 2019
टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 11 नवंबर 2019 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से-मातृ मृत्यु दर और राष्ट्रीय शिक्षा दिवस आदि शामिल हैं.

भारत में मातृ मृत्यु दर में काफी कमी देखी गई: एसआरएस रिपोर्ट

भारत में मातृ मृत्यु दर में कमी देखी जा रही है जो देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. दक्षिणी राज्यों में प्रति एक लाख जन्म पर एमएमआर 77 से घटकर 72 पर आ गया है जबकि यह आंकड़ा अन्य राज्यों में 93 से घटकर 90 हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक एमएमआर को प्रति एक लाख जन्म पर 70 से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. मातृ मृत्यु दर पर भारत में पहली रिपोर्ट अक्टूबर 2006 में जारी की गई थी. इसमें साल 1997 से साल 2003 के आंकड़ों का उपयोग किया गया था.

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2019: जानिए इसके बारे में सब कुछ

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के अवसर मनाया जाता है. उनका जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था. शिक्षा दिवस के मौके पर भारत शिक्षा के क्षेत्र में अबुल कलाम कलाम द्वारा किए गए कामों को याद करता है.

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्वान थे. वे कवि, लेखक, पत्रकार तथा भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने बचपन से शिक्षा को अपने जीवन का मुख्य श्रेय बनाया था. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे.

अयोध्या विवाद: ASI के प्रमाण क्या हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का आधार बनाया?

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि मंदिर को तोड़ने और मस्जिद बनाने के बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाया कि विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को दी गई है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच के लिए विवादित स्थल की खुदाई की. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर साल 2003 में विवादित स्थल पर कराई गई खोदाई में मिले भग्नावशेषों से मंदिर के दावे को बल मिला था.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

टीएन शेषन भारत में चुनाव नियमों को सख्ती से लागू करवाने हेतु मशहूर थे. टीएन शेषन को उनके कड़े रुख के लिए भी जाना जाता है. वे भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त थे. उन्होंने इस पद पर 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक रहे.

वे अपने सख्त रवैये के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग का चेहरा बदल दिया. उनको चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने हेतु याद किया जाता है. उन्हें साल 1996 में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था.



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CSE Current Affairs 11 Nov, 16:15
करेंट अफेयर्स एक पंक्ति में: 11 नवंबर 2019
करेंट अफेयर्स एक पंक्ति को नए रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, इसमें फेड कप 2019 और विश्व विज्ञान दिवस आदि को सम्मलित किया गया है.

• हाल ही में जिस देश के दक्षिणी क्षेत्र में 53 अरब बैरल के नये तेल भंडार की खोज की गई है- ईरान

• फ्रांस ने जिस देश को हराकर फेड कप 2019 का खिताब जीत लिया है- ऑस्ट्रेलिया

• विश्व विज्ञान दिवस जिस दिन मनाया जाता है-10 नवंबर

• हाल ही में भारत और जिस देश की नौसेनाओं के बीच ‘समुद्र शक्ति’ नौसैनिक अभ्यास का आयोजन किया गया- इंडोनेशिया

• सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या फैसला पर मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही जितने एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है-5 एकड़

• हाल ही में जिस देश ने मातृ मृत्यु दर में गिरावट में पहला स्थान हासिल किया है- केरल

• जिस दिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है-11 नवंबर

• भारत में चुनावी सुधारों की पुरजोर वकालत करने वाले पूर्व चुनाव आयुक्त का नाम यह है जिनका हाल ही में निधन हो गया है- टीएन शेषन

• वह भारतीय गेंदबाज़ द्वारा मात्र 34 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में 50 विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया गया है- युजवेंद्र चहल

• जिस देश में 11वां ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित किया जायेगा- ब्राज़ील

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