"अद्वैत" एक ऐसा शब्द जिसका अर्थ होता है "इसके जैसा अन्य कोई नही"। कई कालो तक मनुष्य प्राणी इस शब्द का प्रयोग ज्ञात और अज्ञात रूप से श्रेष्ट पुरुषो का विस्तार रोकने के लिए करते आ रहे है।
जब भी कोई अच्छा विद्वान, पराक्रमी और श्रेष्ठ उत्तम, व्यक्ति इस संसार में आया है तब तक उनको इस शब्द की रचना में बांध लिया जाता है। बिना सोचे समझे हम उत्तम को अद्वितीय और नीच को "कई होते है" ऐसे अनुचित संज्ञा ब्रम्हांड के ऊर्जाकोष में भेजते जाते है।
जो स्तुति कर रहे होते है उनको यह ज्ञान नही होता कि जिसकी वह स्तुति जिस शब्द से कर रहे है उसका जीवन अर्थहीन होने के प्रार्थना भी वे उसी वक्त कर रहे होते है। लाल - उनके जैसा अन्य कोई न हो यह कहकर। अब टिका करने वाले ये कहेंगे कि शब्द कहने से ज्यादा उसका क्या अर्थ सोचकर कहा है ईसका ज्यादा महत्व है। अब इन्हें कोन समझाये की subconscious चेतना जैसी वस्तु आपका बना बनाया अर्थ नही परंतु जो जो जैसा है वो ऐसा ही ज्ञान में लेती है ।
फिर हो वो हमको परोसती है। फिर वह उस मनुष्य पर निर्भर होता है किया वो उसका क्या अर्थ धारण करे। अब कोई पिछले जन्म में गड़ा हुआ किसी शब्द का अर्थ अगले जन्म में कैसे ज्ञात रखे।
इसलिए मैं संसार के विद्वानों से और लेखकों कवियों से और जन सामान्य से विनती करूँगा की किसी उत्तम स्तुति में अद्वैत ना ही जोड़े। बल्कि ये प्राथना करे कि उनको जैसे बनने की बुद्धि भगवान सबको दे। और अद्वैत जैसे शब्दों की बेड़िया दुराचारी व्यक्ति योके लिए छोड़े। ताकि उनको जैसे फिर कोई नही हो।
words are spells use them wisely because that's why they have spellings.
being conscious while using the appropriate words while praising someone (who deserve to be praise) is so necessary to not give probability that you done wrong very wrong there.
so while praising someone very good person one should make sure that they are not praying with their words that no one should ever become like them after them. These words should be thrown at worst kind of peoples so we see less of them and more of good people.
More on this later.
- A restless soul
जब भी कोई अच्छा विद्वान, पराक्रमी और श्रेष्ठ उत्तम, व्यक्ति इस संसार में आया है तब तक उनको इस शब्द की रचना में बांध लिया जाता है। बिना सोचे समझे हम उत्तम को अद्वितीय और नीच को "कई होते है" ऐसे अनुचित संज्ञा ब्रम्हांड के ऊर्जाकोष में भेजते जाते है।
जो स्तुति कर रहे होते है उनको यह ज्ञान नही होता कि जिसकी वह स्तुति जिस शब्द से कर रहे है उसका जीवन अर्थहीन होने के प्रार्थना भी वे उसी वक्त कर रहे होते है। लाल - उनके जैसा अन्य कोई न हो यह कहकर। अब टिका करने वाले ये कहेंगे कि शब्द कहने से ज्यादा उसका क्या अर्थ सोचकर कहा है ईसका ज्यादा महत्व है। अब इन्हें कोन समझाये की subconscious चेतना जैसी वस्तु आपका बना बनाया अर्थ नही परंतु जो जो जैसा है वो ऐसा ही ज्ञान में लेती है ।
फिर हो वो हमको परोसती है। फिर वह उस मनुष्य पर निर्भर होता है किया वो उसका क्या अर्थ धारण करे। अब कोई पिछले जन्म में गड़ा हुआ किसी शब्द का अर्थ अगले जन्म में कैसे ज्ञात रखे।
इसलिए मैं संसार के विद्वानों से और लेखकों कवियों से और जन सामान्य से विनती करूँगा की किसी उत्तम स्तुति में अद्वैत ना ही जोड़े। बल्कि ये प्राथना करे कि उनको जैसे बनने की बुद्धि भगवान सबको दे। और अद्वैत जैसे शब्दों की बेड़िया दुराचारी व्यक्ति योके लिए छोड़े। ताकि उनको जैसे फिर कोई नही हो।
words are spells use them wisely because that's why they have spellings.
being conscious while using the appropriate words while praising someone (who deserve to be praise) is so necessary to not give probability that you done wrong very wrong there.
so while praising someone very good person one should make sure that they are not praying with their words that no one should ever become like them after them. These words should be thrown at worst kind of peoples so we see less of them and more of good people.
- A restless soul