Hindi Antarvasna - हिंदी अंतरवासना


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हिंदी अन्तर्वासना (@HindiAntarvasna) कामुकता से भरी सेक्स कहानियाँ...
पढ़िए अन्तर्वासना, कामुकता, कामसूत्र, मस्तराम, हिंदी सेक्स कहानी, हिंदी चुदाई कहानी, देसी चुदाई, बीवी की चुदाई और बहुत सारे मस्त कहानियाँ..
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कुछ ही देर में पारस की ट्रेन चली गई, मैं जल्दी से गाड़ी में आकर बैठ गया और फ़ोन निकाल कर रिकॉर्डिंग ऑन की…इस टेप को सुनने में पूरे 3 घंटे लगे, टेप सुनने में ही मेरी हालत खराब हो गई और मैंने दो बार मुठ मारी.मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था कि सलोनी इस कदर सेक्सी हो सकती है, उसने एक भारतीय नारी की सारी हदें पार कर दी थीं.मुझे लगा कि शायद मैं अपने बिज़नेस में कुछ ज्यादा ही व्यस्त हो गया था जो उसकी इच्छाएँ नहीं समझ पाया.तो आप भी सुन लीजिए मेरे सगे भाई पारस और मेरी ब्याहता बीवी सलोनी की बातचीत, एक एक शब्द आगे वर्णित है……
मैं- अच्छा जान मैं चलता हूँ, पारस तैयार रहना शाम को मिलते हैं.सलोनी- बाय जान अपना ध्यान रखना.सलोनी- ओह पारस, क्या करते हो रुको तो… अरे, दरवाजा तो बंद करने दो… लगता है… आज तो पगला गए हो.पारस- हाँ भाभी, आज मेरा आखरी दिन है, तुमको तो पता है फिर 6 महीने के बाद आ पाऊँगा.सलोनी- ओह मुझे पता है बेबी, मैं खुद उदास हूँ पर ओह… रुको ना… उतार रही हूँ ना… क्या पजामी फ़ाड़ोगे? ये लो… आज तुम्हारा जो दिल चाहे कर लो… आज मेरी ओर से तुमको हर तरह की आजादी..पारस- यू आर ग्रेट भाभी… आई लव यू… पुच… पुच…सलोनी- अब तुमने मुझे पूरी नंगी तो कर दिया है… देखो सुबह तुमने कितना गन्दा कर दिया था… पहले मैं नहा लूँ… फिर जो तुम्हारी मर्जी कर लेना.पारस- आज तो मैं आपको एक पल भी नहीं छोड़ूँगा… चलो… मैं आपको नहलाता हूँ.सलोनी- क्या करते हो पारस… अभी तो नहाये हो तुम… फिर से गीले हो जाओगे… आआअ… ऊऊऊ…उईईईईई… क्या कर रहे हो…ह्ह्ह्ह्हाआआआ… खिलखिलाने की आवाजें आओहूऊऊओ…पारस- भाभी सच बताओ, तुम्हारी चूत इतनी प्यारी कैसे है… कितनी छोटी… वाउउउउ… कितनी चिकनी… ये तो बिल्कुल छोटी सी बच्ची जैसी है… पुच पुच… च… च… च… पुच च च…सलोनी- अहाआआ… ह्हह्हाआ… अब नहाने भी दे… या चाटता ही रहेगा… ओहूऊऊ… ओह… हा… हा… हे… हेह… ही… ही…पारस- पुच… चाप… चप… चपर… पुच…सलोनी- अच्छा ये बता… तूने कितनी बच्ची की चूत देखी हैं जो तुझे पता है कि वो ऐसी होती है.पारस- क्या भाभी… ये तो पता ही है न… और मैंने तो कई की देखी है और…सलोनी- अच्छा बच्चू… इसका भी दीवाना है लेकिन गलत बात अब ऐसा नहीं करना…पारस- ओह भाभी… ठीक है… नहीं करूँगा मगर कान तो छोड़ो.सलोनी- नहीं छोड़ूंगी… तुम छोड़ते हो जब मेरे दूध पकड़ लेते हो… तो हा हा… अब मैं भी नहीं छोड़ती…पारस- ठीक है… मत छोड़ो… लो मैं भी पकड़ लेता हूँ…सलोनी- हीईई… हूऊऊऊऊ… अहाआआ… उईईईईइ…पारस- अहाआ… आआअ…सलोनी- ओहूऊऊ… यहाँ नहीं राजा… ओहू… हो… अहाआआ… निकाल न… अहाआआ… नहा तो लेने दे… नअहाआआ…पारस- नहला ही तो रहा हूँ… यह तो आपकी चूत की अंदर की सफाई कर रहा है… आहा… आहा…सलोनी- हाँ हाँ… मुझे सब पता है यह कौन सी सफाई कर रहा है… आहा… आअ… अआ… अआ… ओह… ओह…अहाआआ… आहा… आअ… आअ… आहाहा… हाआह…पारस- ओह भाभी… कितनी गर्म है चूत आपकी… आहा हा… ओह आहा… हा ओह… अह्ह्हा… ओह… हह…सलोनी- बस्स्स्स्स्स्स्स… राजाआआआ… ओहोहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…पारस- आआआह्हह्हह्हह्ह… बस्स… भाभी हो गया… आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआअह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह…पारस- आहा भाभी… मजा आ गया, तुम बहुत हॉट हो जानम, तुम्हारी इस चूत को चोदकर मेरे लण्ड को पूरा करार मिल जाता है.सलोनी- हाँ लाला… तुमने भी मेरी जिंदगी में पूरे रंग भर दिए हैं. तुम्हारे भैया तो बेडरूम और बिस्तर के अलावा मुझे कहीं हाथ भी नहीं लगाते, अहा और तुमने इस घर में हर जगह मुझे चोदा है. मैं निहाल हो गई तुम्हारी चुदाई पर.पारस- हाँ भाभी… चुदाई का मजा तो जगह और तरीके बदल बदल कर करने में ही आता है.सलोनी- सही कहा तुमने… आज यहाँ बाथरूम में मजा आ गया.पारस- अच्छा और कल जब बालकोनी में किया था?सलोनी- धत्त पागल… वो तो मैं बहुत डर गई थी. लेकिन सच बोलूँ तो बहुत मजा आया था. सूरज की रोशनी में खुले में, ना जाने किस किसने देखा होगा.पारस- अरे भाभी… वही तो मजा है… और आपने देखा नहीं कल आपकी चूत सबसे ज्यादा गरम थी और कितना पानी छोड़ रही थी.सलोनी- हाँ हाँ… चल अब तेरी सारी इच्छा पूरी हो गई ना, बेडरूम से लेकर बाथरूम, बालकोनी, रसोई सब जगह तूने अपने मन की कर ली ना, और मुझे यह गन्दी भाषा भी सिखा दी, अब तो तू खुश है ना?पारस- अभी कहाँ मेरी जान… अभी तो दिल में सैकड़ों अरमान हैं… आप तो बस देखती जाओ… हा… हा… हा…सलोनी- तू पूरा पागल है… चल अब हट…ट्रनन्न्नन ट्रन्नन्नन्नन्नन्नन्नसलोनी- अरे कौन आया इस वक्त…?पारस- लगता है कूरियर वाला है.सलोनी- जा तू ले ले… तौलिया बांध लेना कमर में… या होने इसी पेन से साइन करेगा… हा… हा… हा… हाहा…पारस- हे हे… हंसो मत भाभी… आज आपको एक और मजा कराता हूँ… जाओ कूरियर आप लो… बहुत मजा आएगा.सलोनी- पागल है क्या… मुझे कपड़े पहनने में आधा घंटा लग जायेगा, जल्दी जा ना… तू ले ले.
ट्रनन्न्नन.....
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कहानी जारी रहेगी....


अब तो आप लोगों के बिना मन ही नहीं लगेगा.कह मेरे से रहा था जबकि देख सलोनी को रहा था.फिर सलोनी ने ही कहा- सुनो, मुझे जरा बाज़ार जाना है, कुछ कपड़े लेने हैं.मैं- यार, मेरे पास तो टाइम ही नहीं है, तुम पारस के साथ चली जाना.सलोनी- ठीक है, थोड़े पैसे दे जाना.मैं- ठीक है, क्या लेना है, कितने दे दूँ.सलोनी- अब दो तीन जोड़ी तो अंडरगार्मेन्ट्स ही लाने हैं, एक तो अभी ही टूट गई, अब कोई बची ही नहीं, थोड़े ज्यादा ही दे देना.वो मुस्कुराते हुए पारस को ही देख रही थी.पहले तो मैं कोई ध्यान नहीं देता था मगर अब उन दोनों की ये बातें सुन सब समझ रहा था.सलोनी- अच्छा 5000 दे देना, अबकी बार अच्छी और महंगे वाले चड्डी ब्रा लाऊँगी.वो बिना शरमाये अपने कपड़ो के नाम बोल रही थी.मैं- ठीक है जान, ज़रा अच्छी क्वालिटी की लाना और पहन भी लिया करना.पारस- हा… हा… हा… भैया, ठीक कहा आपने. हाँ भाभी… ऐसे लाना जिनको पहन भी लो… आपको तो पता नहीं, पर ऐसे कपड़ों में दूसरों को कितनी परेशानी होती होगी.सलोनी उसके कान पकड़ते हुए- अच्छा बच्चू ! बहुत बड़ा हो गया है तू अब. ऐसी नजर रखता है अपनी भाभी पर? बेटा सोच साफ़ होनी चाहिए, कपड़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता.पारस- हाँ भाभी, आपने ठीक कहा, मैंने तो मजाक किया था.मैं उन दोनों की नोकझोंक सुन कर मुस्कुरा रहा था, कुछ बोला नहीं, बस सोच रहा था कि कैसे इन दोनों की आज की हरकतें जानी जाएँ. अब घर पर मेरा टिकना तो सम्भव नहीं था.तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, मैंने सलोनी के पर्स में रु० रखते हुए सोचा, उसका यह पर्स मेरी समस्या कुछ हद तक दूर कर सकता है.मैंने कुछ समय पहले एक आवाज रिकॉर्ड करने वाला पेन voice recorder लिया था, मैंने उसको ऑन करके सलोनी के पर्स में नीचे की ओर डाल दिया.उसकी क्षमता लगभग 8 घंटे की थी, अब जो कुछ भी होगा, कम से कम उनकी आवाजें तो रिकॉर्ड हो ही जाएंगी.मैंने पहले भी यह चेक किया था, जबर्दस्त पॉवर वाला था और एक सौ मीटर की रेंज की आवाजें रिकॉर्ड कर लेता था.अब मैं निश्चिंत हो सबको बाय कर ऑफिस के लिए निकल गया.सोचा किअब शाम को आकर देखते हैं क्या होता है पूरे दिन…मैं शाम 7 बजे वापस आया, घर का माहौल थोड़ा शांत था, सलोनी कुछ पैक कर रही थी, पारस अपने कमरे में था.मैं भी अपने कमरे में जाकर कपड़े बदलने लगा कि तभी मुझे सलोनी का पर्स दिख गया.मैंने तुरंत उसे खोलकर वो पेन निकाला, वो अपने आप ऑफ हो गया था.पर्स में मुझे 3-4 बिल दिखे हैं, मैंने उनको चेक किया, सलोनी ने काफी शॉपिंग की थी.उसकी 2 लायेन्ज़री Lingerie, कुछ कॉस्मेटिक और पारस की टी-शर्ट, नेकर और अंडरवियर भी थे.आमतौर पर मैं कभी ये सब नहीं देखता था पर जब सलोनी की सब हरकतें आसानी से दिख रही थी तो अब मेरा दिल उनकी सभी बातें जानने का था, आज तो उनके बीच बहुत कुछ हुआ होगा.
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मगर यह सब अभी सम्भव नहीं था, मैंने पेन से मेमरी चिप निकाल कर अपने पर्स में रख ली, सोचा कि बाद में सुनुँगा.बाहर पारस सलोनी को मना रहा था- मत उदास हो भाभी, फिर जल्दी ही आऊँगा.ओह ! सलोनी इसलिए उदास थी !मैंने भी उसको हंसाने की कोशिश की मगर वो वैसी ही बनी रही उदासमना.मैं- पारस, कितने बजे की ट्रेन है तेरी?पारस- भैया, 8:50 की है, मैं 8 बजे ही निकल जाऊँगा.मैं- पागल है क्या? मैं छोड़ दूँगा तुझे स्टेशन पर, आराम से चलेंगे, चल खाना खा लेते हैं.पारस- आप क्यों परेशान होते हो भैया, मैं चला जाऊँगा.मैं- नहीं, तुझसे कहा ना ! सलोनी तुम भी चलोगी ना.सलोनी- नहीं, मुझे अभी बहुत काम हैं, और मैं इसको जाते नहीं देख पाऊँगी, इसलिए तुम ही जाओ.मैं मन ही मन मुस्कुरा उठा- ओह… इतना प्यार…!!और तभी मन में एक कौतुहल भी जागा कि पारस को छोड़ने के बाद मेरे पास इन दोनों की बात सुनने का समय होगा.और हम जल्दी जल्दी खाना खाने लगे.मैंने बाथरूम में जाकर चिप अपने फ़ोन में लगा ली और रिकॉर्डिंग चेक की.थैंक्स गॉड ! सब कुछ ठीक था और उसमें बहुत कुछ मसाला लग रहा था.फिर सब कुछ जल्दी ही हो गया और हम जाने के लिए तैयार हो हो गए.मैं बाहर गाड़ी निकालने आ गया, पारस अपनी भाभी को अच्छी तरह मिलकर दस मिनट बाद बाहर आया.मैं- क्या हुआ? बड़ी देर लगा दी?पारस- हाँ भैया, भाभी रोने लगी थीं.मैं- हाँ, वो तो पागल है, सभी को दिल से चाहती है.पारस- हाँ भैया, भाभी बहुत अच्छी हैं, उनका पूरा ख्याल रखना.मैं- अच्छा बच्चू, अभी तक कौन रख रहा था?पारस- नहीं भैया, मेरा यह मतलब नहीं था. आप काम में बिजी रहते हो ना, इसलिए कह रहा था.मैं- हाँ वो तो है ! चल अच्छा, अपना ध्यान रखना और किसी चीज की जरूरत हो तो बता देना.पारस- हाँ भैया, आपसे नहीं तो किससे कहूँगा.मुझे उसके जाने की बहुत जल्दी थी, मैं उस टेप को सुनना चाह रहा था.


मगर इस समय वो चूत मेरे छोटे भाई पारस के हाथ में थी। पता नहीं वो नालायक उसको कैसे छेड़ रहा होगा।
अब फिर से भयंकर मादक आवाजें आने लगीं।
सलोनी- ह्हाआ… आअ… आआआअ… ओहू… ऊऊओ पारस… नहीईई… प्लीजज्ज… नहीं… ईईईई…
पारस- भाभी… इइइ… बस जरा सा झुक जाओ।
सलोनी- वो आते होंगे ! तुम मानोगे नहीं।
पारस- भाभी, भैया अभी नहा ही रहे हैं, शॉवर की आवाज आ रही है, उनके आने से पहले हो जायेगा। बस जरा सा आह… आआआ…
सलोनी- ओह… ऊऊओ… क्या करते हो ओह… ऊऊ… वहाँ नहीं पारस… आहआ… आआआआ… आआआआआ… सूखा ही आआआ… तुम तो मार ही दोगे।
‘पागल, मैंने कितनी बार कहा है गांड में डालने से पहले कुछ चिकना लगा लो।’
पारस- मैंने थूक लगाया था ना और आपकी चूत का पानी भी लगाया था… अहा…आआआ… क्या छेद है भाभी… मजा आ गया।
सलोनी- चल पहले मलाई लगा…
‘अरे क्या करता है सब दूध ख़राब कर दिया, हाथ से लेकर लगा न, लण्ड ही दूध में डाल दिया… तू तो वाकयी पगला गया है।’
पारस- जल्दी करो भाभी… जब लण्ड पी सकती हो तो क्या लण्ड से डूबा दूध नहीं… अहा… जल्दी करो…
सलोनी- अहा… आआ… धीरे… पागल… ह्हाआआअ… ह्हाआअ… ओहूऊऊऊ…
दस मिनट तक उनकी आवाजें आती रहीं।
झूठ नहीं बोलूंगा, मैंने भी नहाने के लिए अपने कपड़े निकाल दिए थे और इस समय पूरा नंगा ही उन दोनों को सुन रहा था, मेरा लण्ड भी पूरा खड़ा था और मैं उसको मुठिया रहा था।
सलोनी- अहा… हाआआआ… पारस बहुत जबर्दस्त है तुम्हारा लण्ड… अहा…आआ… क्या मस्त चोदते हो… अहा… बस करो न अब… ऐईईईइ…
पारस- आआ… आआआ… आआ… ह्हह्ह… बस हो गया भाभी आआआह ह्ह्ह्ह्हा…
सलोनी- ओह… ऊऊऊ… क्या कर रहे हो… सब गन्दा कर दिया… उफ्फ्फ… फ्फ्फ्फ्फ…
तभी पारस पूरा नंगा अपना तौलिया उठा बाहर आ गया।
उसका लण्ड अभी भी तना था और पूरा लाल दिख रहा था।
और फिर सलोनी भी बाहर आई, माय गॉड क्या लग रही थी।
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उसका टॉप बिल्कुल ऊपर था उसकी दोनों चूची बाहर निकली थी जिन पर लाल निशान दिख रहे थे।
ऊपर तनी हुई सफ़ेद चूची पर गुलाबी निप्पल चूसे और मसले जाने की कहानी साफ़ कह रहे थे।
उसकी ब्रा एक और को लटकी थी उसकी शायद तक एक फीता टूट गया था।
और नीचे तो पूरा धमाकेदार दृश्य था उसकी पजामी उसके पंजों में थी।
और वो पजामी के साथ ही पैरों को खोलकर चल रही थी।
उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा मन उसमें अपना लण्ड एक झटके में डालने को कर रहा था।
रसोई से बाहर आ उसने तौलिया लिया और मेरी ओर पीठ करके अपनी चूत साफ करने लगी।
उसकी कमर से लेकर चूतड़ों तक पारस का वीर्य फैला था। वो जल्दी जल्दी साफ़ करते हुए पीछे मुड़ कर बाथरूम की ओर भी देख रही थी।
उसकी इस स्थिति को देखते हुए मेरे लण्ड ने भी पानी छोड़ दिया।
अब मैं नीचे उतर बिना नहाये केवल हाथ मुंह धोकर ही बाहर आ गया। हाँ, थोड़े से बाल जरूर भिगो लिए जिससे नहाया हुआ लगूँ।
बाहर एक बार फ़िर सब कुछ सामान्य था, सलोनी फिर से रसोई में थी और पारस शायद अपने कमरे में था।
रसोई से बाहर आ उसने तौलिया लिया और मेरी ओर पीठ करके अपनी चूत साफ करने लगी.उसकी कमर से लेकर चूतड़ों तक पारस का वीर्य फैला था. वो जल्दी जल्दी साफ़ करते हुए पीछे मुड़ कर बाथरूम की ओर भी देख रही थी.उसकी इस स्थिति को देखते हुए मेरे लण्ड ने भी पानी छोड़ दिया.अब मैं नीचे उतर बिना नहाये केवल हाथ मुंह धोकर ही बाहर आ गया. हाँ, थोड़े से बाल जरूर भिगो लिए जिससे नहाया हुआ लगूँ.बाहर एक बार फ़िर सब कुछ सामान्य था, सलोनी फिर से रसोई में थी और पारस शायद अपने कमरे में था.हाँ बाहर एक कुर्सी पर सलोनी की ब्रा जरुर पड़ी थी जो उनकी कहानी वयां कर रही थी.वो कितना भी छुपाएँ पर सलोनी ब्रा को बाहर ही भूल गई थी.मैंने उससे थोड़ी मस्ती करने की सोची और पूछा- सलोनी, क्या हुआ? तुम्हारी ब्रा कहाँ गई.मगर बहुत चालाक हो गई थी वो अब ! कहते हैं न कि जब ऐसा वैसा कोई काम किया जाता है तो चालाकी अपने आप आ जाती है.वो तुरन्र बोली- अरे काम करते हुए तनी टूट गई तो निकाल दी.मैंने फिर उसको सताया- कौन सा काम बेबी?वो अब भी सामान्य थी- अरे, ऊपर स्लैब से सामान उतारते हुए जान !मैं अब कुछ नहीं कह सकता था, हाँ, उसके चूसे हुए होंटों को एक बार चूमा और अपने कमरे में आ गया.तो यह था मेरा पहला कड़वा या मीठा अनुभव, कि मेरी प्यारी जान मेरी सीधी सी लग वाली बीवी सलोनी ने कैसे मेरे भाई से अपनी नन्ही-मुन्नी चुदवाई.हाँ, एक अफ़सोस जरूर था मुझे कि मैं उसको देख नहीं पाया ! मगर फिर भी सब कुछ लाइव ही तो था, देख नहीं पाया, सुना तो सब था मैंने, अपनी बीवी की सीत्कारें रसोई में मेरे भाई से चुदवाते हुए !मैं तैयार होकर बाहर आया, नाश्ता लग चुका था.पारस भी तैयार हो गया था.मैं- पारस, आज कहाँ जाना है, मैं छोड़ दूँ.पारस- नहीं भैया, कहीं नहीं, आज आराम ही करूँगा, आज रात की गाड़ी से तो वापसी है मेरी.मैं- हाँ, आज तो तुझको जाना ही है, कुछ दिन और रुक जाता.पारस- आऊँगा ना भैया, अगली छुट्टी मिलते ही यहीं आऊँगा.


कम से कम सलोनी मेरा ख्याल तो रख ही रही थी, मेरी बेइज्जती तो नहीं कर रही थी। अब मेरे पीछे वो कुछ अपनी इच्छाओं को पूरा कर रही थी तो मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगा।
ये सब सोच मेरा मन बहुत हल्का हो गया और अपना काम ख़त्म कर मैं अंदर आ गया।
अंदर सब कुछ सामान्य था, सलोनी रसोई में वैसे ही काम कर रही थी और पारस बाथरूम में था।
करीब दस मिनट के बाद पारस नहाकर बाहर निकला, उसके कसरती बदन पर केवल कमर में एक पतला तौलिया बंधा था जिसमें उसके लण्ड के आकार का आभास हो रहा था।
मैं अपने कपड़े ले बाथरूम में चला गया, सलोनी वैसे ही रसोई में काम करती रही।
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पारस- भैया, क्या हुआ? आज कुछ जल्दी है?
मैं- हाँ आज जरा जल्दी ऑफिस जाना है। सलोनी जल्दी नाश्ता तैयार कर दो, मैं बस फ़टाफ़ट नहाकर आता हूँ।
मैंने बाथरूम से सलोनी को बोल दिया।
सलोनी- ठीक है, आप नहा कर आइये, नाश्ता तैयार ही है। पारस तुम भी जल्दी से आ जाओ सब साथ ही कर लेंगे।
पारस- ठीक है, भाभी मैं तो तैयार ही हूँ, ऐसे ही कर लूँगा।
मैंने बाथरूम में शॉवर चलाया और उन दोनों को देखने का सोचा।
बाथरूम की एक तरफ़ की दीवार में ऊपर की ओर छोटा रोशनदान है जो हवा के लिए खुला रहता है, वहाँ से रसोई का कुछ भाग दिखता है और मैं उनकी बातें भी सुन सकता था।
मैंने पानी का ड्रम खिसकाकर रोशनदान के नीचे किया और उस पर चढ़कर रसोई में देखने का प्रयास किया।
वहाँ से कुछ भाग ही दिख रहा था, पर उनकी बातों की आवाज जरूर सुनाई दे रही थी।
पारस- भाभी, क्या बनाया नाश्ते में आज?
सलोनी- सब कुछ तुम्हारी पसन्द का ही है, ब्रेड सैंडविच और चाय या कॉफी जो तुम कहो।
पारस- आपको तो पता है, मैं ये सब नहीं पीता, मुझे तो दूध ही पसन्द है।
सलोनी- हाँ हाँ… मुझे पता है और वो भी तुम सीधे ही पीते हो।
और दोनों के जोर से हंसने की आवाज आई।
सलोनी- अरे क्या करते हो, अभी मैंने मना किया था न ! उफ़्फ़… क्या कर रहे हो !
मैंने बहुत कोशिश की दोनों को देखने की मगर कभी कभी जरा सा भाग ही दिख रहा था।
मगर यह निश्चित था कि पारस मेरी बीवी के दूध पी रहा था।
अब वो टॉप के ऊपर से पी रहा था या टॉप उठाकर यह मेरे लिए भी सस्पेन्स था।
मैं तो केवल उनकी आवाजें सुनकर ही उत्तेजित हो रहा था।
सलोनी- ओह पारस, क्या कर रहे हो? प्लीज अभी मत करो ! देखो, वो आते होंगे… ओह… नहीं… आह… क्या करते हो। ओह पारस… तुमने अंडरवियर भी नहीं पहना।
पारस- पुच… पुच… सुपरररर… सपरर… अहाआआ… भाभी, कितने मस्त हैं आपके मम्मे… ओह्ह्ह भाभी, ऐसे ही सहलाओ… आहा… कितना मस्त सहलाती हो आप लण्ड को… आहाअ… ओह्हओ… पुच… पुच…
मैं रोशनदान से टंगा उनकी आवाजें सुनरहा था और सोच रहा था कि ये मेरे सामने ही कितना आगे बढ़ सकते हैं। क्या आज ही मुझे इनकी चुदाई देखने को मिल जायेगी।
पता नहीं क्या होगा…
तभी मुझे पारस की छाया सी दिखी, वो कुछ पीछे को हुआ था।
“ओह माय गॉड… वो पूरा नंगा था, उसका तौलिया उसके पैरों में था जिसे उसने अपने पैरों से पीछे को धकेला।
शायद उसी के लिए वो पीछे को हुआ होगा।
मुझे उसका लण्ड तो नहीं दिखा मगर मैं इतना मूर्ख भी नहीं था कि यह न समझ सकूँ कि इस स्थिति में उसका लण्ड 90 डिग्री पर खड़ा ही होगा।
अब सोचने वाली बात यह थी कि मेरे घर में रहते वो क्या करेगा।
वो फिर आगे को हो गया और मेरी नजरों से ओझल हो गया।
तभी फिर से आवाजे आने लगीं…
सलोनी- तुम बिल्कुल पागल हो पारस… क्या करते हो, तुम्हारा लण्ड कितना सख्त हो रहा है।
पारस- हाँ भाभी, अहा… आज तो भैया के सामने ही यह तुम्हारी चूत में जाना चाहता है… ओहू…ओ… अहाह… ह…
सलोनी- नहीं… ईईईइ… पारस… प्लीज ऐसा मत करो, मैं उनके सामने ऐसा नहीं कर सकती। मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ। अहाआ… आ… पारस… हा… हा… ओह… मत करो न… तुम बहुत बदमाश हो गए हो।
‘अहा… क्या करते हो… प्लीज तुम्हारा लण्ड तो आज मेरी पजामी ही फाड़ देगा… अहाआ… आआ… नहीं… ईईईई…’
पारस- पुच… पुछ्ह्ह्ह्ह… अहह… हआआ… आज नहीं छोड़ूंगा… ओहू… ऊओ… लाओ इसको हटा दो।
सलोनी- नहींईई पारस… क्या करते हो, पगला गए हो, देखो वो आते ही होंगे, मान जाओ ना प्लीज ह्ह्हाआ… ओह… ऊऊओह…
पारस- वह भाभी… क्या मस्त चूत है आपकी… बिल्कुल छोटी बच्ची की तरह… कितनी चिकनी और छोटी सी… दिल करता है खा जाऊँ… इसको…
वाकयी सलोनी की चूत बहुत खूबसूरत है, उसके छोटे छोटे होंट ऐसे आपस में चिपके रहते हैं जैसे किसी किशोर लड़की के… और चूत का रंग गुलाबी है जो उसकी गदराई सफ़ेद जांघों में जान डाल देता है।
उसकी चूत बहुत गर्म है और उसके होंटों को खोल जब लाली दिखती है तो मुझे पक्का यकीन है कि बुड्ढों तक का लण्ड पानी छोड़ दे।


पता नहीं क्यों मैं उन दोनों को देखने अंदर ही रुक जाता हूँ, ऐसा पहली बार हुआ था, शायद मैंने सोचा कि सलोनी का वो सेक्सी रूप देख कर पारस को कैसा लगा होगा? क्या वो सलोनी को कुछ कहेगा?
मगर तभी पारस की आवाज आई- क्या भाभी, बाहर क्या कर रहे हैं भैया, क्या आज सुबह सुबह उनको बाहर निकाल दिया।
सलोनी- चल पागल, वो पौधों में पानी देने गए हैं।
पारस- वाह, मतलब आज सुबह ही मौका मिल गया? चलो तो इस पौधे में पानी हम डाल देते हैं।
उसकी यह बात सुनते ही मेरा माथा ठनक गया, यह क्या कह रहा है पारस?
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मैंने दरवाजे की आड़ लेते हुए रसोई में झाँका और मेरे सारे सपने चकनाचूर हो गए, पारस अपनी भाभी से पीछे से चिपका था और उसके हाथ उसको आगे से बांधे हुए थे।
सलोनी- हाथ हटा न पगले, तेरे भैया अभी आते ही होंगे और यह पौधा तो घर में ही है, जब चाहे पानी डाल देना।
मैंने थोड़ा और आगे को होकर देखा तो पारस का सीधा हाथ सलोनी के पजामी के अंदर था। मतलब वो उसकी चूत सहला रहा था, जो बिना किसी अवरोध के उसकी हथेली के नीचे थी।
पारस- भाभी, क्या गजब माल लग रही हो आज और आपकी चूत पर तो हाथ रखते ही मन करता है कि..
सलोनी- हाँ…हाँ, मुझे पता चल रहा है कि तुम्हारा क्या मन कर रहा है वो तो तुम्हारा यह मोटा मूसल लौड़ा ही बता रहा है जो पजामी के साथ ही मेरे चूतड़ों के बीच में मेरी गाण्ड घुसा जा रहा है।
मैं उनकी बातें सुन कर धक्क से रह गया था कि सलोनी कभी मेरे सामने इतना खुलकर ऐसे नहीं बोलती थी, कभी कभी मेरे बहुत ज़ोर देने पर बोल देती थी मगर आज तो पराये मर्द के सामने रंडी की तरह बोल रही थी।
तभी उसने पीछे हाथ कर पारस का लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया। पारस ने न जाने कब उसे अपने पजामे से बाहर निकाल लिया था वो अब सलोनी के हाथ में था। तभी सलोनी घूमी तो मैंने देखा कि उसकी पजामी चूत से नीचे खिसकी हुई है अब उसकी नंगे सुतवाँ पेट के साथ उसकी छोटी सी चूत भी दिख रही है, पारस के लण्ड को सलोनी ने अपने हाथ से सहला कर उसके पजामे में कर दिया और बोली- इसको अभी आराम करने दो, इस सबके लिए अभी बहुत समय मिलेगा।
मैं उनकी ये सब हरकतें देख चुपचाप बाहर आ गया और सोचने लगा कि क्या करूँ।
मैं कुछ देर के लिए बाहर आकर अपना सर पकड़कर बैठ गया। एक पल तो मुझे लगा कि मेरी दुनिया पूरी लुट गई है, मैं लगभग चेतनाहीन हो गया था पर जब अंदर से कुछ आवाजें आईं तब मैं उठा और पौधों को पानी देने लगा।
सलोनी- हाँ…हाँ, मुझे पता चल रहा है कि तुम्हारा क्या मन कर रहा है वो तो तुम्हारा यह मोटा मूसल लौड़ा ही बता रहा है जो पजामी के साथ ही मेरे चूतड़ों के बीच में मेरी गाण्ड मे घुसा जा रहा है।
मैं उनकी बातें सुन कर धक्क से रह गया था कि सलोनी कभी मेरे सामने इतना खुलकर ऐसे नहीं बोलती थी, कभी कभी मेरे बहुत ज़ोर देने पर बोल देती थी मगर आज तो पराये मर्द के सामने रंडी की तरह बोल रही थी।
तभी उसने पीछे हाथ कर पारस का लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया। पारस ने न जाने कब उसे अपने पजामे से बाहर निकाल लिया था वो अब सलोनी के हाथ में था। तभी सलोनी घूमी तो मैंने देखा कि उसकी पजामी चूत से नीचे खिसकी हुई है अब उसकी नंगे सुतवाँ पेट के साथ उसकी छोटी सी चूत भी दिख रही है, पारस के लण्ड को सलोनी ने अपने हाथ से सहला कर उसके पजामे में कर दिया और बोली- इसको अभी आराम करने दो, इस सबके लिए अभी बहुत समय मिलेगा।
मैं उनकी ये सब हरकतें देख चुपचाप बाहर आ गया और सोचने लगा कि क्या करूँ।
मैं कुछ देर के लिए बाहर आकर अपना सर पकड़कर बैठ गया। एक पल तो मुझे लगा कि मेरी दुनिया पूरी लुट गई है, मैं लगभग चेतनाहीन हो गया था पर जब अंदर से कुछ आवाजें आईं तब मैं उठा और पौधों को पानी देने लगा।
पानी देते हुए अचानक अपने भाई पारस की बात दिमाग में गूंजने लगी और न जाने कैसे मैं सोचने लगा कि पौधे की जगह मेरी बीवी नंगी अपनी टाँगें फैलाये लेटी है और पारस अपने लण्ड को हिला हिला कर अपना पानी उसकी चूत में डाल रहा है।
और ये सब सोचते ही मेरा अपना लण्ड सर उठाने लगा जाने कैसी बात है यह कि अभी दिमाग काम नहीं कर रहा था और अब लण्ड भी पूरे जोश में था।
अब मेरे सामने दो ही रास्ते थे कि या तो लड़ झगड़ कर सब कुछ ख़त्म कर लिया जाये या फिर खुद भी मज़े करो और उसको भी करने दो।
मैंने दूसरा रास्ता चुना क्योंकि मैं भी पाक साफ नहीं था और सेक्स को मजे की तरह ही देखता था।
सबसे बड़ी बात तो यही थी कि सलोनी एक पत्नी के रूप में तो मेरा पूरा ख्याल रखती ही थी बाकी शायद उसकी अपनी इच्छाएँ थी।
मेरे मन में बस यही ख्याल आ रहा था कि ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसमें जो मिले उसे भोग लेना चाहिए।


मेरी चालू बीवी.... अपडेट 1
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हाय दोस्तो मेरा नाम साहिल है मेरी उम्र सत्ताईस साल है और मेरी बीवी सलोनी छब्बीस साल की है, हमारी शादी को लगभग ढाई साल हो गए हैं। अभी हमारा कोई बच्चा नहीं है। मैं औसत कदकाठी का साधारण काम करने वाला इंसान हूँ, समाज भीरू, अपनी कोई बात जगजाहिर करना नहीं चाहता और सेक्स के मामले में भी साधारण ही हूँ।
मगर इसे अपनी किस्मत कहूँ या बदकिस्मती कि मेरी शादी एक बहुत सुन्दर लड़की सलोनी से हो गई वो एक क़यामत ही है 5 फुट 4 इंच लम्बी, बिल्कुल दूध जैसा सफ़ेद रंग जिसमें सिंदूर मिला हो और गजब के उसके अंग, वक्ष 36″ पतली कमर शायद 26″ और खूब उभरे हुए उसके कूल्हे 38 ! उसके चूतड़ इतने गद्देदार हैं कि अच्छों-अच्छों का लण्ड पानी छोड़ देता है जिसे मैंने कई बार महसूस किया है, उसकी इसी गांड के कारण सुहागरात को मेरे लण्ड ने भी जवाब दे दिया था।
चलिए वो किस्सा भी आपको बता देता हूँ।
सुहागरात में उसके गोरे सुन्दर और गर्म बदन ने ही मुझे बहुत उत्तेजित कर दिया था और ऊपर से जब मैं उसको प्यार कर रहा था तब वो उल्टी पेट के बल बिस्तर पर लेट गई उसके सफ़ेद बदन पर केवल एक काली पैंटी थी जो उसके चूतड़ों को गजब का सेक्सी बना रही थी।
फिर जब उसकी पीठ को चूमते हुए जब मैं उसकी कच्छी उसके चूतड़ों से नीचे उतारने लगा तो उसके हिलते हुए चूतड़ों के बीच उसका सुरमई गुदा-द्वार देख मेरे छक्के छूट गए और जैसे ही मैंने उसकी झांकती गुलाबी, चिकनी चूत जिसके दोनों होंट आपस में चिपके थे, देखते ही मेरे पसीने छूट गए।
उसके इन अंगों ने मुझे उसके सामने शर्मिन्दा करवा दिया। मगर उसने बड़े प्यार से मुझसे कहा- कोई बात नहीं, ऐसा हो जाता है।
उसका यह प्यार अभी भी जारी है, वो कभी कोई मांग नहीं रखती और न कभी मुझसे लड़ाई करती है और मेरा बहुत ध्यान रखती है इसलिए मैं उससे कुछ नहीं कहता और न ही उसकी हरकतों को रोक पा रहा हूँ। कपड़े उसके काफी मॉडर्न ही होते थे पर इसके लिए मैंने कभी उसको मना नहीं किया था।
अब आपसे उसके इसी व्यव्हार के बारे मैं बताऊँगा।
सलोनी हमेशा बहुत हंसमुख सभी से खुलकर बातचीत करने वाली, सभी का ध्यान रखने वाली लड़की है। मेरे सभी दोस्त और रिश्तेदार उसको बहुत पसन्द करते हैं।
हम एक अलग फ्लैट लेकर रहते हैं। पहले साल तक तो सब कुछ मुझे सामान्य ही लगा था और हमारा जीवन भी आम पति-पत्नी जैसा ही बीता था। हाँ, हमारे बीच चुदाई कम होती थी, हफ़्ते में एक-दो बार ही, मगर उसने कभी शिकायत नहीं की और न ही कभी वो कहती, जब मेरा मन होता है, तो वो खुद ही तैयार हो जाती है।
मेरे दोस्तों के साथ उसका हंसी मजाक या मेरे भाइयों के साथ उसकी छेड़छाड़ सब कुछ सामान्य ही लगता था मगर पिछले एक साल से सब कुछ बदल गया है, सलोनी को मैं सीधी-सादी समझता था मगर वो तो सेक्स की मूर्ति निकली, अब तो बस मैं उसको छिपकर उसकी हरकतों को देखता रहता हूँ न तो उससे कुछ कहता हूँ और न ही उसकी किसी बात का विरोध करता हूँ।
शायद यही सुन्दर पत्नी रखने की सजा है।
दोस्तों शादी के बाद का एक साल तो ऐसे ही गुजर गया, या तो मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया सलोनी की हरकतों पर या फिर वो भी सती-सावित्री ही बनी रही।
असली कहानी कोई एक साल बाद शुरू हुई जब मैंने उसकी हरकत पर ध्यान दिया।
हुआ यों कि मेरा छोटा भाई दिल्ली से आया हुआ था, वो वहाँ इंजीनियरिंग कर रहा है, 22 साल का गठीला जवान है, दोनों देवर भाभी में हंसी मजाक होता रहता है।
एक सुबह मैं उठकर अखबार पढ़ते हुए चाय पी रहा था, तभी सलोनी बोली- सुनो, आप पौधों को पानी दो ना, मैं तब तक नाश्ता तैयार कर लेती हूँ।
सलोनी ने गुलाबी सिल्की हाफ पजामी पहनी थी जो उसके घुटनों तक ही थी, वो उसकी जांघों से पूरी तरह कसी हुई थी जिससे उसके चूतड़ बाहर निकले हुए साफ़ दिख रहे थे और इस पजामी में जब वह अंदर चड्डी नहीं पहनती थी तो उसकी चूत का आकार भी साफ़ दिखता था और पीछे से मुझे आज भी उसकी पजामी में कहीं कोई कच्छी का निशान नहीं दिख रहा था, मतलब सामने से उसकी चूत गजब ढहा रही होगी।
मैंने एक दो बार उसको कहा भी है- जान इस पजामी के अंदर कच्छी जरुर पहन लिया करो जब कोई और घर में आया हो !
मगर वो ऐसी बातों को नजरअंदाज़ कर देती थी, मैं भी ज्यादा नहीं टोकता था। ऊपर उसने एक सैंडो टॉप पहना था जो उसके विशाल उरोजों पर कसा था और उसके पेट पर नाभि तक ही आ रहा था उसकी पजामी और टॉप के बीच करीब पाँच इंच सफ़ेद कमर दिख रही थी जो उसको बहुत सेक्सी बना रही थी।
मैं पौधों में पानी डालने बाहर जाने वाला था कि तभी मेरा छोटा भाई भी रसोई में गया- लाओ भाभी मैं आपकी मदद करता हूँ, और भैया कहाँ हैं।


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लोकडाऊन बिताया पडोसी की बेटियो के साथ..

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काफी देर तक ऐसे ही मैं लंड पूरा घुसाकर अंदर मजा लेता रहा. फिर मैंने तेजी से उसे चोदना शुरू कर दिया क्योंकि मैं भी अपने स्खलन की ओर बढ़ रहा था.

मेरे धक्के पूरी ताकत से लगने लगे और मैं उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत को लंड से पीटने लगा.
वो भी ऊंह … ऊंह … अम्म … अम्म … करते हुए अपनी चुदाई के आनंद को बयां करने की कोशिश कर रही थी.

फिर एकदम से उसने मुझे कस कर अपने जिस्म से चिपका लिया और मेरी पीठ को नोंचते हुए मेरी गर्दन पर दांतों से काटने लगी.
उसकी चूत की सिकुड़ने मुझे अपने लंड पर महसूस हुई और उसकी चूत ने बहुत सारा गर्म द्रव छोड़ दिया.

उसकी चूत के गर्म पानी में मेरा लंड नहा गया और मेरे लिये यह एक नया ही अनुभव था. इतना मजा आया कि मैं उसको और जोर जोर से चोदने लगा

फिर पांच मिनट के बाद मेरा भी निकलने हो गया.

अब वो दर्द में कराह रही थी लेकिन फिर भी चुदती जा रही थी- आह्ह … आह्हा … ओह्ह … ईई … ऊईई … फट गयी … आह्ह … मां … मर गयी … ओह्ह मेरी चूत … मेरी चूत … आह्ह मेरी चूत … चोद दो।

उसके इन सीत्कारों से उत्तेजित हो अब मैं भी खुद को रोक न सका और मेरा पूरा लोड उसकी चूत में खाली होने लगा.
लंड से न जाने कितनी आनंद भरी पिचकारियां छूटीं और मैं स्वर्ग सा अनुभव लेता हुआ उसके नंगे जिस्म पर ढेर हो गया.

वो एक हाथ से मेरे बालों को सहलाते हुए दूसरे हाथ को मेरी पीठ और कमर पर फिराने लगी.
वासना का एक तूफान सा आकर गुजर गया था और अब उस अंधेरी रात में पूरा सन्नाटा हो गया था.

प्रियंका की लंड लेने की भूख मिट गयी थी और मेरी उसकी चूत को चोदने की चाह. हम दोनों संतुष्ट हो गये थे.
जिस लड़की की चूत के लिए मैं तरस आ रहा था आज वो खुद ही चुद गयी थी.

फिर हम उठे और अपने अपने कपड़े पहन कर आगे पीछे करके नीचे आ गये.

उसके बाद हम बारी बारी से वॉशरूम में गये.

स्वाति अपने कमरे में ही थी. हमने सोचा कि शायद वो सो गयी है.

उसके बाद मैं और प्रियंका दोनों उसके रूम में साथ में ही सोये.
रात को एक बार फिर से मैंने प्रियंका की चुदाई की.

मगर इस बार चूत नहीं उसकी गांड चुदाई की.
उसकी गांड मारकर बहुत मजा आया.

इसके बाद भी उनके घर में और भी बहुत कुछ हुआ. उसकी छोटी बहन स्वाति भी चुदना चाहती थी. मगर वो कैसे चुदी और प्रियंका के साथ और क्या क्या हुआ वो सब मैं आपको अगली गरम सेक्स की स्टोरी में बताऊंगा.


मैंने उसको बांहों में भींच लिया और उसके होंठों को चूसने लगा.
हम दोनों को मजा आ रहा था.

थोड़ी देर किस करने के बाद मैं उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाने लगा.
बहुत ही मोटे चूचे थे उसके. एकदम से भरे हुए और नर्म.

मैंने कस कर उनको भींच डाला. मैं उसकी लोअर में हाथ डालकर उसकी पैंटी पर से चूत को सहलाने लगा. उसके बूब्स को दबाने लगा.

उसके हाथ मेरी पैंट में जाने के लिए आतुर थे.

हम दोनों बाहर खुले में थे इसलिए वहां पर चुदाई नहीं हो सकती थी. उनकी छत पर बने खाली कमरे में हम घुस गये. वह बिना दरवाजे का कमरा था जिसको वो लोग टूटे फूटे सामान को रखने के लिए इस्तेमाल करते थे.

अंदर जाते ही उसने मेरे होंठों को जोर से चूमा और फिर मेरी पैंट खोलने लगी.

उसने पैंट का बटन खोल दिया और मेरी अंडरवियर में हाथ डाल दिया. अब मेरा लन्ड उसके हाथ में था.

मैंने उसकी टीशर्ट और लोअर उतरवा दी. अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. मैंने अपनी टीशर्ट उतार दी और मैं उसके बूब्स ऊपर से दबाते हुए उसकी ब्रा खोल दी.

उसके बड़े बड़े बूब्स नंगे हो गये और उनको इस हालत में देखने में बहुत मजा आया.
अब मैं उसके बूब्स को अपने मुंह में लेने लगा.

फिर मैंने अपने हाथों से उसकी पेंटी उतार दी.
उसकी चूत मेरे सामने थी जिस पर बाल थे.

मुझे बालों वाली चूत को देखकर बहुत उत्तेजना होती है. चूत को मैंने हाथ से मसल दिया और उसकी चूत के बालों में उंगली फिराने लगा.

प्रियंका सिसकारने लगी. वो खुद ही मेरे हाथ पर हाथ रखकर उसको अपनी चूत पर रगड़वाने लगी.

मैं उसके होंठों को फिर से चूसने लगा. उसकी जांघें अब खुल गयीं और वो अपनी एक टांग को मेरी गांड पर लपेटने की कोशिश करने लगी.

उसकी गर्म चूत को छूकर मैं भी पागल हो रहा था.
मुझसे रुका न गया और मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी.

मैं उंगली को अंदर बाहर करने लगा और वो मुझसे लिपटने लगी.

मुझे जोश चढ़ गया और मैं तेजी से उसकी चूत में उंगली करने लगा.

प्रियंका अब पूरी गर्म हो चुकी थी.
मेरी उंगली उसकी चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रही थी और उसकी चूत पूरी गीली हो गयी.

वो जोर से सिसकारियां ले रही थी. उसकी सिसकारियां सुनकर मुझे मज़ा आ रहा था.

अब मैं उसकी चूत में दो उंगली डालने लगा और उसको और मजा आया.
फिर मैंने तीसरी उंगली दी तो वो कराह गयी.

अब उसने मेरे लंड को तेजी से मसलना शुरू कर दिया.
वो बोली- कर लो ना अब … स्वाति आ गयी तो मेरी चूत प्यासी रह जायेगी.

मैं बोला- आह्ह डार्लिंग … चूत मारने ही तो आया हूं. एक बार मेरे औजार को तो गर्म कर दे. मुंह में ले ले एक बार प्लीज?
वो मान गयी और नीचे बैठ कर मेरे लंड को उसने मुंह में भर लिया.

लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे लंड नहीं कोई आइसक्रीम हो.

उसके होंठ मेरे टोपे पर रगड़ते तो मैं स्वर्ग सा आनंद पा रहा था.
मन कर रहा था कि ये मेरे लंड को ऐसे ही रात भर चूसती रहे.

मगर ये संभव नहीं था क्योंकि हमारे पास इतना समय ही नहीं था.
तीन चार मिनट तक मैंने लंड चुसवाने का पर्याप्त मजा लिया और फिर उसको खड़ी कर लिया.

मैं घुटनों के बल उसकी जांघों के पास बैठ गया और उसकी एक टांग को मैंने कंधे पर चढ़वा लिया. फिर नीचे से उसकी चूत में जीभ डाल दी और उसके हाथ मेरे सिर पर कस गये.

वो अपनी चूत को आगे पीछे धकेलने लगी जैसे मेरे मुंह को ही चोद रही हो.

उसकी झरती हुई चूत से निकलते रस को मैं साथ साथ चाट जा रहा था. उसकी चूत का रस पीकर बहुत मजा आया.

उसके बाद मैंने उसे नीचे लेटा दिया और उसकी चूत पर अपने लन्ड का सुपारा रख कर सहलाने लगा.
वो सिसकारते हुए बोली- क्या इरादा है … मेरी चूत को प्यासी रखेगा क्या आज … या ऐसे ही तड़पाता रहेगा? जल्दी कर दे, अगर स्वाति आ गयी तो सारा मूड खराब हो जायेगा.

मैंने उसकी चूत पर लंड को कई बार रगड़ा और फिर उसने खुद ही मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को खाने लगी.

नीचे हाथ ले जाकर उसने मेरे लंड को चूत के छेद पर टिका कर लंड को अंदर ले लिया.

उसकी चूत में मेरा लंड अंदर सरकने लगा. धीरे धीरे करके मैंने पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया. ऐसा लग रहा था कि उसने चूत में बहुत मैथुन की हुई है. हो सकता था कि वह चुदी हुई भी हो क्योंकि उसको लंड लेने हल्की फुल्की दिक्कत ही हुई.

धीरे से मैंने उसकी चूत में अपना पूरा लौड़ा डाल दिया।

वह थोड़ी उचकी मगर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये फिर मैंने धीरे से धक्के देने शुरू कर दिये.
पूरा लंड चूत में घुसने लगा था.

मैं धीरे-धीरे से उसकी चूत में धक्के मारने लगा.
उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लीं.

मैं भी जैसे उसकी चूत में पुरा घुस जाना चाहता था. मैंने पूरी ताकत लगाकर लंड अंदर जड़ तक घुसा दिया.

उसकी आह्ह … निकल गयी. मैंने ऐसे ही अपना मूसल अंदर तक फँसाये रखा और लंड को वहीं पर गोल गोल घुमाते हुए उसकी चूत की चटनी बनाने लगा.
बहुत मजा आ रहा था दोस्तो.


गरम सेक्स की स्टोरी में पढ़ें कि लॉकडाउन में मैं घर पर अकेला था. मेरी पड़ोसन आंटी अपने रिलेटिव के यहां फंस गयी और उनकी बेटियां घर पर अकेली थीं.

दोस्तो, अन्तर्वासना पर मैं आप सबका स्वागत करता हूं. मैं अपनी हिन्दी सेक्स कहानी आप सबके साथ साझा करना चाहता हूं और बता दूं कि यह मेरी सच्ची गरम सेक्स की स्टोरी है।

यह घटना मेरे साथ कुछ दिनों पहले ही लॉकडाउन में घटी थी जब मेरी फैमिली के सभी लोग गांव चले गए थे.

मेरे पड़ोस में एक आंटी रहती हैं. संयोग ऐसा हुआ कि उस वक्त वो भी अपने किसी रिश्तेदार के यहां गयी हुई थी और लॉकडाउन के कारण वहीं पर फंस कर रह गयी.

आंटी की दो बेटियां हैं. एक प्रियंका और दूसरी स्वाति (बदले हुए नाम). बड़ी वाली प्रियंका 24 साल की है और उसका रंग गोरा है. उसका कद 5 फीट 5 इंच है. उसके बूब्स भी बड़े बड़े हैं और उसकी गांड भी उभरी हुई दिखाई देती है।

उसकी छोटी बहन स्वाति है जो कि हाइट में 5 फीट 1 इंच की है. उसकी चूची अभी छोटी ही हैं. उसकी गांड भी ज्यादा मोटी नहीं है. देखने में ठीक है और शरीर से हल्की ही है.

मगर उसकी बड़ी दीदी पूरी चोदू माल है.

आंटी मुझे अच्छी तरह से जानती हैं तो हमारे अच्छे संबंध हैं। जब उन्हें पता चला कि मैं भी शहर में हूं तो उन्होंने मुझसे उनके घर रुक जाने के लिए कहा.

मैं भी मना नहीं कर पाया क्योंकि आंटी की मजबूरी थी और पड़ोसी तो मजबूरी में ही काम आते हैं. इसलिए मैंने उनको तसल्ली दी कि वो चिंता न करें और मैं उनके घर में सब संभाल लूंगा.

अरे, मैं आप लोगों को अपने बारे में तो बताना भूल ही गया!
मेरा नाम आयुष है. उम्र 20 साल है और हाइट 5 फीट 7 इंच है. रंग में गोरा हूं और बॉडी भी अच्छी है.

मुझे प्रियंका पहले से ही पसंद थी. उसके साथ कई बार मेरी बात भी होती थी और हंसी मजाक भी कर लेते थे.
छोटी वाली स्वाति के साथ केवल हाय-हैलो होती थी.

तो दोस्तो, मैं आंटी के घर पहुंच गया. वो दोनों जाते ही खुश हुईं क्योंकि वो भी अकेली थीं और उनको भी अब टाइम पास करने के लिए एक साथी मिल गया था.

उस दिन शाम को हम लोगों में बहुत बातें हुईं. फिर हमने डिनर किया और उसके बाद ऑस्कर विजेता मूवी ‘पैरासाइट’ देखने लगे.
मैं इसको पहले ही देख चुका था.

मुझे पता था कि मूवी के अंदर एक सेक्स सीन भी आयेगा. जब वो सेक्स सीन आया तो तीनों की नजर लैपटॉप स्क्रीन पर ही गड़ी हुई थी.
तीनों ही थोड़े असहज भी हो रहे थे क्योंकि मैं लड़का था और वो दोनों लड़की.

मगर फिर भी तीनों देखते ही रहे. उसके बाद प्रियंका उठी और बाथरूम में चली गयी.
वो दो मिनट के बाद वापस आ गयी. शायद चूत को सहला कर आई थी.

वो मेरे पास ही बैठी थी और मैंने हल्के से उसके हाथ पर हाथ रख दिया.
उसने कुछ नहीं कहा.

फिर मैंने अपनी टांग भी थोड़ी उसकी टांग पर चढ़ा दी. उसने फिर मेरी ओर देखा और इशारे से कहा कि स्वाति देख रही है.

मैंने टेढ़ी नजर की तो उसकी बहन हमें ही देख रही थी.
हम दोनों के बीच में ये छेड़छाड़ देख स्वाति ने दूसरी ओर से मेरा हाथ पकड़ लिया.

मैं तो हैरान हो गया.
अब मुझे लगने लगा कि ये तो दोनों ही तैयार हैं.

समस्या ये थी कि दोनों को एक ही घर में कैसे चोदूं? हालांकि दोनों बहनें आपस में एक दूसरी को ये नहीं जता रही थीं कि वो मेरे साथ मजा लेने के लिए तैयार हैं.

इसलिए स्वाति ने अपना हाथ हटा लिया.

अब प्रियंका भी आराम से बैठ गयी. कुछ देर के बाद प्रियंका अपने फोन में बिजी हो गयी. मैं और स्वाति मूवी देखते रहे.

फिर स्वाति उठकर वॉशरूम में जाने लगी. मैंने इंतजार किया लेकिन वो वापस नहीं आई. फिर न जाने क्यों मेरे मन में ख्याल आया कि कहीं वो मेरी ही इंतजार तो नहीं कर रही?

मैं भी चुपचाप उठकर चला गया.

देखा तो स्वाति वहीं खड़ी हुई थी. हम दोनों की नजरें मिली और वो मेरे पास आकर मेरे गले से लिपट गयी.

मैंने भी उसको बांहों में भरा और उसको चूमने लगा. उसकी गांड दबाकर मैंने उसके होंठों को चूस डाला.

दो मिनट तक ये किस चली और फिर हम अलग हो गये.
मैंने चुपके से उसके कान में कह दिया- यहां पर कुछ करना ठीक नहीं है. प्रियंका को शक हो जायेगा.

ये बोलकर मैं वहां से चला आया और स्वाति वहीं से किचन में चली गयी ताकि प्रियंका को शक न हो.

दस मिनट के बाद स्वाति सबके लिए दूध गर्म करके ले आयी.

हम तीनों ने दूध पीया और फिर स्वाति उठकर अपने रूम में चली गयी.

मैंने प्रियंका से कहा- मैं छत पर टहलने जा रहा हूं. मेरा पेट भारी हो रहा है.
दरअसल ये मेरा उसको छत पर बुलाने का इशारा था.

हुआ भी ऐसा ही.
मुझे छत पर आए हुए पांच मिनट ही हुए थे कि चुपके से प्रियंका भी ऊपर आ गयी और उसने जीने के गेट को बाहर से बंद कर दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ बोलता उसने मुझे धकेलते हुए दीवार से सटा लिया और मेरे होंठों को किस करने लगी.


😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁
स्कूल में जब कोई कार्यक्रम हो तब,

आजकल के बच्चे:- I am feeling Excited !

और हमारे समय में:- बस्ता लेकर आना है या नहीं ?

@HindiAntarvasna
😝😅😅😜😜😂😂🤣🤣


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Girl – Mom I am प्रेग्नेंट I

Mom – क्या ….. कैसे ?

Girl – It was an Accident.

Mom – Accident कलमुही सड़क पे चलते – चलते लौड़े पे गिर गयी थी, क्या ?

😂😂😂😂😂😂😂😂😂😂


@HindiAntarvasna

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इश्क़ किया था हमने भी, हम भी रातों को जागे थे,

जब OYO रूम में पड़ा छापा तो बिना कपड़ो के सड़क पर भागे थे।
😝😜😝😜

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शीला आंटी- मुझे चोदो ना ?

लड़का- नहीं तुम बहुत मोटी हो ।

शीला आंटी-अबे भोसड़ी के

"चिकन का मजा बोटी में "

और

" चूत का मजा मोटी में ।"


😝😜😝😜


1k❤️

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